अन्वयः
ततः then, महातेजाः effulgent, परमक्रुद्धः enraged, शिलाशितान् sharpened by stone, सूर्यसन्निभान् glowing like the Sun, चतुर्दश fourteen, नाराचान् arrows, जग्राह took.
Summary
Then the effulgent Rama, mighty angry, took fourteen arrows sharpened by stones and glowing like the Sun.
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| पश्चान् | पश्चात् (अव्ययः) |
| महातेजा | महत्–तेजस् (१.१) |
| नाराचान् | नाराच (२.३) |
| सूर्यसंनिभान् | सूर्य–संनिभ (२.३) |
| जग्राह | जग्राह (√ग्रह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| परमक्रुद्धश् | परम–क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| चतुर्दश | चतुर्दशन् (२.१) |
| शिलाशितान् | शिला–शित (√शा + क्त, २.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तः | प | श्चा | न्म | हा | ते | जा |
| ना | रा | चा | न्सू | र्य | सं | नि | भान् |
| ज | ग्रा | ह | प | र | म | क्रु | द्ध |
| श्च | तु | र्द | श | शि | ला | शि | तान् |