पदच्छेदः
| रुक्मपुङ्खाश् | रुक्म–पुङ्ख (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| विशिखाः | विशिख (१.३) |
| प्रदीप्ता | प्रदीप्त (√प्र-दीप् + क्त, १.३) |
| हेमभूषणाः | हेमन्–भूषण (१.३) |
| अन्तरिक्षे | अन्तरिक्ष (७.१) |
| महोल्कानां | महत्–उल्का (६.३) |
| बभूवुस् | बभूवुः (√भू लिट् प्र.पु. बहु.) |
| तुल्यवर्चसः | तुल्य–वर्चस् (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रु | क्म | पु | ङ्खा | श्च | वि | शि | खाः |
| प्र | दी | प्ता | हे | म | भू | ष | णाः |
| अ | न्त | रि | क्षे | म | हो | ल्का | नां |
| ब | भू | वु | स्तु | ल्य | व | र्च | सः |