सा नदन्ती महानादं जवाच्छूर्पणखा पुनः ।
उपगम्य खरं सा तु किंचित्संशुष्क शोणिता ।
पपात पुनरेवार्ता सनिर्यासेव वल्लरी ॥
सा नदन्ती महानादं जवाच्छूर्पणखा पुनः ।
उपगम्य खरं सा तु किंचित्संशुष्क शोणिता ।
पपात पुनरेवार्ता सनिर्यासेव वल्लरी ॥
अन्वयः
किञ्चित् slightly, संशुष्कशोणिता blood dried up, सनिर्यासा juice exuded, सल्लकी इव like a sallaki tree, सा she, तु but, आर्ता afflicted, खरम् to Khara, उपगम्य coming, पुनरेव again, पपात fell down.M N Dutt
Seeing them fallen-on the ground, the Rākşasī, beyond herself in wrath, approaching Khara, with her blood a little dried up, again in distressful guise threw herself on the earth, like a plant exuding gum.Summary
Her blood slightly dried up, she came back afflicted to Khara and fell down like a sallaki tree, its sap oozing.पदच्छेदः
| सा | तद् (१.१) |
| नदन्ती | नदत् (√नद् + शतृ, १.१) |
| महानादं | महत्–नाद (२.१) |
| जवाच् | जव (५.१) |
| छूर्पणखा | शूर्पणखा (१.१) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| उपगम्य | उपगम्य (√उप-गम् + ल्यप्) |
| खरं | खर (२.१) |
| सा | तद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| किंचित् | कश्चित् (२.१) |
| संशुष्कशोणिता | संशुष्क–शोणित (१.१) |
| पपात | पपात (√पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| एवार्ता | एव (अव्ययः)–आर्त (१.१) |
| सनिर्यासेव | स (अव्ययः)–निर्यास (१.१)–इव (अव्ययः) |
| वल्लरी | वल्लरी (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सा | न | द | न्ती | म | हा | ना | दं | ज | वा | च्छू | र्प |
| ण | खा | पु | नः | उ | प | ग | म्य | ख | रं | सा | तु |
| किं | चि | त्सं | शु | ष्क | शो | णि | ता | प | पा | त | पु |
| न | रे | वा | र्ता | स | नि | र्या | से | व | व | ल्ल | री |