निपातितान्प्रेक्ष्य रणे तु राक्षसा;न्प्रधाविता शूर्पणखा पुनस्ततः ।
वधं च तेषां निखिलेन रक्षसां; शशंस सर्वं भगिनी खरस्य सा ॥
निपातितान्प्रेक्ष्य रणे तु राक्षसा;न्प्रधाविता शूर्पणखा पुनस्ततः ।
वधं च तेषां निखिलेन रक्षसां; शशंस सर्वं भगिनी खरस्य सा ॥
अन्वयः
शूर्पणखा Surpanakha, रणे in the fight, निपातितान् fallen, राक्षसान् demons, दृश्य seeing, पुनः ततः then, प्रधाविता she ran, भगिनी sister, रक्षसाम् of demons, वधम् about the death, सर्वम् all, निखिलेन in detail, खरस्य to Khara, शशंस told.M N Dutt
Seeing those Rākşasas slain in battle, Śūrpanakhā again hastened (to his brother); and the sister of Khara, related in detail the slaughter of those Rākşasas.Summary
When Surpanakha saw the demons fall dead on the battleground, she ran to Khara,her brother and told in detail about the death of the demons.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे विंशस्सर्गः॥Thus ends the twentieth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| निपातितान् | निपातित (√नि-पातय् + क्त, २.३) |
| प्रेक्ष्य | प्रेक्ष्य (√प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| रणे | रण (७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| राक्षसान् | राक्षस (२.३) |
| प्रधाविता | प्रधावित (√प्र-धाव् + क्त, १.१) |
| शूर्पणखा | शूर्पणखा (१.१) |
| पुनस् | पुनर् (अव्ययः) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| वधं | वध (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| तेषां | तद् (६.३) |
| निखिलेन | निखिल (३.१) |
| रक्षसां | रक्षस् (६.३) |
| शशंस | शशंस (√शंस् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सर्वं | सर्व (२.१) |
| भगिनी | भगिनी (१.१) |
| खरस्य | खर (६.१) |
| सा | तद् (१.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | पा | ति | ता | न्प्रे | क्ष्य | र | णे | तु | रा | क्ष | सा |
| न्प्र | धा | वि | ता | शू | र्प | ण | खा | पु | न | स्त | तः |
| व | धं | च | ते | षां | नि | खि | ले | न | र | क्ष | सां |
| श | शं | स | स | र्वं | भ | गि | नी | ख | र | स्य | सा |
| ज | त | ज | र | ||||||||