अन्वयः
धर्मात्मा righteous man, राघवोऽपि Rama too, चामीकरविभूषितम् decked with gold, महत् great, चापम् bow, सज्यम् stringed, चकार made, तानि those, रक्षांसि to the demons, अब्रवीत् च said.
M N Dutt
And the righteous Rāghava strung his mighty bow decked with gold; and addressed the Raksasas.
Summary
Righteous Rama too, lifted up his great bow decked with gold and fastened the string and then said to the demons:
पदच्छेदः
| राघवो | राघव (१.१) |
| ऽपि | अपि (अव्ययः) |
| महच् | महत् (२.१) |
| चापं | चाप (२.१) |
| चामीकरविभूषितम् | चामीकर–विभूषित (√वि-भूषय् + क्त, २.१) |
| चकार | चकार (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| सज्यं | सज्य (२.१) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| तानि | तद् (२.३) |
| रक्षांसि | रक्षस् (२.३) |
| चाब्रवीत् | च (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| रा | घ | वो | ऽपि | म | ह | च्चा | पं |
| चा | मी | क | र | वि | भू | षि | तम् |
| च | का | र | स | ज्यं | ध | र्मा | त्मा |
| ता | नि | र | क्षां | सि | चा | ब्र | वीत् |