अन्वयः
लक्ष्मण O Lakshmana, अस्मासु for us, यत् whatever, अभिप्रेतम् desired, यत् that, वरवृतं च those boons desired, कैकेय्याः by Kaikeyi's, प्रियम् joy, अद्यैव to day itself, क्षिप्रम् now itself, सुसंवृतम् attained well.
Summary
O Lakshmana whatever Kaikeyi desired through her boons has now come true so soon.
पदच्छेदः
| यद् | यद् (१.१) |
| अभिप्रेतम् | अभिप्रेत (√अभिप्र-इ + क्त, १.१) |
| अस्मासु | मद् (७.३) |
| प्रियं | प्रिय (१.१) |
| वरवृतं | वर–वृत (√वृ + क्त, १.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| यत् | यद् (१.१) |
| कैकेय्यास् | कैकेयी (६.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सुसंवृत्तं | सु (अव्ययः)–संवृत्त (√सम्-वृत् + क्त, १.१) |
| क्षिप्रम् | क्षिप्रम् (अव्ययः) |
| अद्यैव | अद्य (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | द | भि | प्रे | त | म | स्मा | सु |
| प्रि | यं | व | र | वृ | तं | च | यत् |
| कै | के | य्या | स्तु | सु | सं | वृ | त्तं |
| क्षि | प्र | म | द्यै | व | ल | क्ष्म | ण |