या न तुष्यति राज्येन पुत्रार्थे दीर्घदर्शिनी ।
ययाहं सर्वभूतानां हितः प्रस्थापितो वनम् ।
अद्येदानीं सकामा सा या माता मम मध्यमा ॥
या न तुष्यति राज्येन पुत्रार्थे दीर्घदर्शिनी ।
ययाहं सर्वभूतानां हितः प्रस्थापितो वनम् ।
अद्येदानीं सकामा सा या माता मम मध्यमा ॥
अन्वयः
दीर्घदर्शिनी farsighted lady, या such a lady as she is, पुत्रार्थे for her son, राज्येन with kingdom, न तुष्यति not being contended, यया by whomsoever, सर्वभूतानाम् of all beings, प्रियः dear, अहम् I, वनम् forest, प्रस्थापितः is sent, या whoever, मम my, मध्यमा माता middle mother, सा she, अद्य today, सकामा has her desire fulfilled.Summary
Kaikeyi, my middle mother is farsighted indeed Not content with the kingdom alone see sent me, beloved of all beings, away to the forest. Let her cherished desire be fulfilled.पदच्छेदः
| या | यद् (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| तुष्यति | तुष्यति (√तुष् लट् प्र.पु. एक.) |
| राज्येन | राज्य (३.१) |
| पुत्रार्थे | पुत्र–अर्थ (७.१) |
| दीर्घदर्शिनी | दीर्घ–दर्शिन् (१.१) |
| ययाहं | यद् (३.१)–मद् (१.१) |
| सर्वभूतानां | सर्व–भूत (६.३) |
| हितः | हित (१.१) |
| प्रस्थापितो | प्रस्थापित (√प्र-स्थापय् + क्त, १.१) |
| वनम् | वन (२.१) |
| अद्येदानीं | अद्य (अव्ययः)–इदानीम् (अव्ययः) |
| सकामा | स (अव्ययः)–काम (१.१) |
| सा | तद् (१.१) |
| या | यद् (१.१) |
| माता | मातृ (१.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| मध्यमा | मध्यम (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| या | न | तु | ष्य | ति | रा | ज्ये | न | पु | त्रा | र्थे | दी |
| र्घ | द | र्शि | नी | य | या | हं | स | र्व | भू | ता | नां |
| हि | तः | प्र | स्था | पि | तो | व | नम् | अ | द्ये | दा | नीं |
| स | का | मा | सा | या | मा | ता | म | म | म | ध्य | मा |