अन्वयः
इत्येवम् thus, उक्ता addressed, खरेण by Khara, परिसान्त्विता pacified, दुर्दर्षा in invincible woman, सास्रे tearful, नयने eyes, विमृज्य wiping, भ्रातरम् to brother, खरम् to Khara, अब्रवीत् said.
M N Dutt
Thus addressed, and consoled by Khara, that irrepressible one, wiping her eyes, spoke to Khara.
Summary
Thus consoled by Khara, invincible Surpanakha wiped her tearful eyes and said to her brother:
पदच्छेदः
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्ता | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| दुर्धर्षा | दुर्धर्ष (१.१) |
| खरेण | खर (३.१) |
| परिसान्त्विता | परिसान्त्वित (√परि-सान्त्वय् + क्त, १.१) |
| विमृज्य | विमृज्य (√वि-मृज् + ल्यप्) |
| नयने | नयन (२.२) |
| सास्रे | स (अव्ययः)–अस्र (२.२) |
| खरं | खर (२.१) |
| भ्रातरम् | भ्रातृ (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | त्ये | व | मु | क्ता | दु | र्ध | र्षा |
| ख | रे | ण | प | रि | सा | न्त्वि | ता |
| वि | मृ | ज्य | न | य | ने | सा | स्रे |
| ख | रं | भ्रा | त | र | म | ब्र | वीत् |