मत्स्यैः पुष्पैर्द्रुमैः शैलैश्चन्द्रसूर्यैश्च काञ्चनैः ।
माङ्गल्यैः पक्षिसंघैश्च ताराभिश्च समावृतम् ॥
मत्स्यैः पुष्पैर्द्रुमैः शैलैश्चन्द्रसूर्यैश्च काञ्चनैः ।
माङ्गल्यैः पक्षिसंघैश्च ताराभिश्च समावृतम् ॥
पदच्छेदः
| मत्स्यैः | मत्स्य (३.३) |
| पुष्पैर् | पुष्प (३.३) |
| द्रुमैः | द्रुम (३.३) |
| शैलैश् | शैल (३.३) |
| चन्द्रसूर्यैश् | चन्द्र–सूर्य (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| काञ्चनैः | काञ्चन (३.३) |
| माङ्गल्यैः | माङ्गल्य (३.३) |
| पक्षिसंघैश् | पक्षिन्–संघ (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| ताराभिश् | तारा (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| समावृतम् | समावृत (√समा-वृ + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | त्स्यैः | पु | ष्पै | र्द्रु | मैः | शै | लै |
| श्च | न्द्र | सू | र्यै | श्च | का | ञ्च | नैः |
| मा | ङ्ग | ल्यैः | प | क्षि | सं | घै | श्च |
| ता | रा | भि | श्च | स | मा | वृ | तम् |