अन्वयः
बलोत्सिक्तम् man proud of his strength, तं राघवम् to that Rama, अस्य and his, भ्रातरम् brother, लक्ष्मणं च and Lakshmana, तीक्ष्णैः by sharp, सायकैः with arrows, अहत्वा without killing, उपावर्तितुम् to return, नोत्सहे I am not intending.
Summary
I do not wish to return, without killing with my sharp arrows that Rama who is proud of his strength and his brother Lakshmana.
पदच्छेदः
| राघवं | राघव (२.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| बलोत्सिक्तं | बल–उत्सिक्त (√उत्-सिच् + क्त, २.१) |
| भ्रातरं | भ्रातृ (२.१) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| लक्ष्मणम् | लक्ष्मण (२.१) |
| अहत्वा | अहत्वा (अव्ययः) |
| सायकैस् | सायक (३.३) |
| तीक्ष्णैर् | तीक्ष्ण (३.३) |
| नोपावर्तितुम् | न (अव्ययः)–उपावर्तितुम् (√उपा-वृत् + तुमुन्) |
| उत्सहे | उत्सहे (√उत्-सह् लट् उ.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| रा | घ | वं | तं | ब | लो | त्सि | क्तं |
| भ्रा | त | रं | चा | पि | ल | क्ष्म | णम् |
| अ | ह | त्वा | सा | य | कै | स्ती | क्ष्णै |
| र्नो | पा | व | र्ति | तु | मु | त्स | हे |