अन्वयः
खरस्वनाः of harsh voice, मांसादाः flesheating, मृगपक्षिणः beasts and birds, जनस्थानसमीपे near Janasthana, समागम्य flocking, विविधान् different kinds of, विस्वरान् hoarse voice, चक्रुः created.
Summary
Flesheating beasts and birds flocked at Janasthana producing a cacophony.
पदच्छेदः
| जनस्थानसमीपे | जनस्थान–समीप (७.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| समाक्रम्य | समाक्रम्य (√समा-क्रम् + ल्यप्) |
| खरस्वनाः | खर–स्वन (१.३) |
| विस्वरान् | विस्वर (२.३) |
| विविधांश् | विविध (२.३) |
| चक्रुर् | चक्रुः (√कृ लिट् प्र.पु. बहु.) |
| मांसादा | मांसाद (१.३) |
| मृगपक्षिणः | मृग–पक्षिन् (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ज | न | स्था | न | स | मी | पे | च |
| स | मा | क्र | म्य | ख | र | स्व | नाः |
| वि | स्व | रा | न्वि | वि | धां | श्च | क्रु |
| र्मां | सा | दा | मृ | ग | प | क्षि | णः |