तत्कर्म रामस्य महारथस्य; समेत्य देवाश्च महर्षयश्च ।
अपूजयन्प्राञ्जलयः प्रहृष्टा;स्तदा विमानाग्रगताः समेताः ॥
तत्कर्म रामस्य महारथस्य; समेत्य देवाश्च महर्षयश्च ।
अपूजयन्प्राञ्जलयः प्रहृष्टा;स्तदा विमानाग्रगताः समेताः ॥
अन्वयः
तदा then, देवाश्च gods, महर्षयश्च great sages, समेताः collected together, विमानाग्रगताः standing on the aerial chariots, समेत्य assembled, प्रहृष्टाः delighted, प्राञ्जलयः with folded palms, महारथस्य of the great warrior, रामस्य Rama's, तत् that, कर्म task, अपूजयन् adored.M N Dutt
And the celestials and Maharsis exceedingly rejoiced, assembled in the welkin in a body, and with joined hands extolled that feat of that mighty car-warrior Rāma.Summary
Then the gods, along with great sages came down in aerial chariots and assembled there. Delighted, they adored Rama, the great warrior, with folded hands for the work done.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकिय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे अष्टाविंशस्सर्गः॥Thus ends the twentyeigth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| तत् | तद् (२.१) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| महारथस्य | महत्–रथ (६.१) |
| समेत्य | समेत्य (√समा-इ + ल्यप्) |
| देवाश् | देव (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| महर्षयश् | महत्–ऋषि (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| अपूजयन् | अपूजयन् (√पूजय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| प्राञ्जलयः | प्राञ्जलि (१.३) |
| प्रहृष्टास् | प्रहृष्ट (√प्र-हृष् + क्त, १.३) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| विमानाग्रगताः | विमान–अग्र–गत (√गम् + क्त, १.३) |
| समेताः | समेत (√समा-इ + क्त, १.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त्क | र्म | रा | म | स्य | म | हा | र | थ | स्य |
| स | मे | त्य | दे | वा | श्च | म | ह | र्ष | य | श्च |
| अ | पू | ज | य | न्प्रा | ञ्ज | ल | यः | प्र | हृ | ष्टा |
| स्त | दा | वि | मा | ना | ग्र | ग | ताः | स | मे | ताः |