अन्वयः
रामेण by Rama, एवम् in that way, उक्तः having said, खरः Khara, संरक्तलोचनः eyes turned red, (ततः then), प्रहसन् laughed, क्रोधमूर्छितः lost his senses in anger, रामम् to Rama, प्रत्युवाच replied.
M N Dutt
Thus addressed by Rāma, Khara enraged and beyond himself with passion, with eyes reddened, replied.
Summary
Challenged by Rama in that manner, Khara, his senses switched off, eyes turned red due to anger, replied laughing :
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्तस् | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| रामेण | राम (३.१) |
| क्रुद्धः | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| संरक्तलोचनः | संरक्त (√सम्-रञ्ज् + क्त)–लोचन (१.१) |
| प्रत्युवाच | प्रत्युवाच (√प्रति-वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| रामं | राम (२.१) |
| प्रहसन् | प्रहसत् (√प्र-हस् + शतृ, १.१) |
| क्रोधमूर्छितः | क्रोध–मूर्छित (√मूर्छय् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | मु | क्त | स्तु | रा | मे | ण |
| क्रु | द्धः | सं | र | क्त | लो | च | नः |
| प्र | त्यु | वा | च | त | तो | रा | मं |
| प्र | ह | स | न्क्रो | ध | मू | र्छि | तः |