अन्वयः
क्षणदाचर O nightranger लोकविरुद्धम् that which is against the world, कर्म deeds, कुर्वाणम् who does, तीक्ष्णम् a terrific, सर्वजनः all people, आगतम् befallen, दुष्टम् cruel, सर्पमिव like a serpent, हन्ति will kill.
Summary
O nightranger, one who does a horrific deed which is against the world will be killed like an evil serpent come near.
पदच्छेदः
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| लोकविरुद्धं | लोक–विरुद्ध (√वि-रुध् + क्त, २.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| कुर्वाणं | कुर्वाण (√कृ + शानच्, २.१) |
| क्षणदाचर | क्षणदा–चर (८.१) |
| तीक्ष्णं | तीक्ष्ण (२.१) |
| सर्वजनो | सर्व–जन (१.१) |
| हन्ति | हन्ति (√हन् लट् प्र.पु. एक.) |
| सर्पं | सर्प (२.१) |
| दुष्टम् | दुष्ट (√दुष् + क्त, २.१) |
| इवागतम् | इव (अव्ययः)–आगत (√आ-गम् + क्त, २.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| क | र्म | लो | क | वि | रु | द्धं | तु |
| कु | र्वा | णं | क्ष | ण | दा | च | र |
| ती | क्ष्णं | स | र्व | ज | नो | ह | न्ति |
| स | र्पं | दु | ष्ट | मि | वा | ग | तम् |