अन्वयः
मुक्तकण्ठनिक्षिप्य released pressure on the neck, महास्वनम् with loud voice, शङ्कुकर्णम् of pointed ears as an iron peg, भैरवस्वनम् fearful sound नदन्तम् making, तं विराधम् that Viradha, श्वभ्रे in the pit, प्राक्षिपत् dropped.
Summary
Rama took his foot off Viradha's neck and dropped his body with pointed ears into the pit while Viradha was groaning fearfully৷৷
पदच्छेदः
| तं | तद् (२.१) |
| मुक्तकण्ठम् | मुक्त (√मुच् + क्त)–कण्ठ (२.१) |
| उत्क्षिप्य | उत्क्षिप्य (√उत्-क्षिप् + ल्यप्) |
| शङ्कुकर्णं | शङ्कु–कर्ण (२.१) |
| महास्वनम् | महत्–स्वन (२.१) |
| विराधं | विराध (२.१) |
| प्राक्षिपच् | प्राक्षिपत् (√प्र-क्षिप् लङ् प्र.पु. एक.) |
| छ्वभ्रे | श्वभ्र (७.१) |
| नदन्तं | नदत् (√नद् + शतृ, २.१) |
| भैरवस्वनम् | भैरव–स्वन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तं | मु | क्त | क | ण्ठ | मु | त्क्षि | प्य |
| श | ङ्कु | क | र्णं | म | हा | स्व | नम् |
| वि | रा | धं | प्रा | क्षि | प | च्छ्व | भ्रे |
| न | द | न्तं | भै | र | व | स्व | नम् |