राक्षसी भ्रातरं क्रूरं सा ददर्श महाबलम् ।
तं दिव्यवस्त्राभरणं दिव्यमाल्योपशोभितम् ।
राक्षसेन्द्रं महाभागं पौलस्त्य कुलनन्दनम् ॥
राक्षसी भ्रातरं क्रूरं सा ददर्श महाबलम् ।
तं दिव्यवस्त्राभरणं दिव्यमाल्योपशोभितम् ।
राक्षसेन्द्रं महाभागं पौलस्त्य कुलनन्दनम् ॥
पदच्छेदः
| राक्षसी | राक्षसी (१.१) |
| भ्रातरं | भ्रातृ (२.१) |
| क्रूरं | क्रूर (२.१) |
| सा | तद् (१.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महाबलम् | महत्–बल (२.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| दिव्यवस्त्राभरणं | दिव्य–वस्त्र–आभरण (२.१) |
| दिव्यमाल्योपशोभितम् | दिव्य–माल्य–उपशोभित (√उप-शोभय् + क्त, २.१) |
| राक्षसेन्द्रं | राक्षस–इन्द्र (२.१) |
| महाभागं | महाभाग (२.१) |
| पौलस्त्यकुलनन्दनम् | पौलस्त्य–कुल–नन्दन (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | क्ष | सी | भ्रा | त | रं | क्रू | रं | सा | द | द | र्श |
| म | हा | ब | लम् | तं | दि | व्य | व | स्त्रा | भ | र | णं |
| दि | व्य | मा | ल्यो | प | शो | भि | तम् | रा | क्ष | से | न्द्रं |
| म | हा | भा | गं | पौ | ल | स्त्य | कु | ल | न | न्द | नम् |