तमब्रवीद्दीप्तविशाललोचनं; प्रदर्शयित्वा भयमोहमूर्छिता ।
सुदारुणं वाक्यमभीतचारिणी; महात्मना शूर्पणखा विरूपिता ॥
तमब्रवीद्दीप्तविशाललोचनं; प्रदर्शयित्वा भयमोहमूर्छिता ।
सुदारुणं वाक्यमभीतचारिणी; महात्मना शूर्पणखा विरूपिता ॥
अन्वयः
अभीतचारिणी fearless wanderer, महात्मना great Lakshmana, विरूपिता disfigured, शूर्पणखा Surpanakha, भयमोहमूर्छिता overcome by fear, प्रदर्शयित्वा showing, दीप्तविशाललोचनम् of large, glittering eyes, तम् him, सुदारुणम् cruel, वाक्यम् these words, अब्रवीत् said.M N Dutt
And transported with fear and desire, Śūrpanakhā, given to fearlessly ranging every where, who had been deformed by that highsouled one, showing (her mutilation), addressed these harsh words to Rāvana of flaming and expansive eyes.Summary
Showing her body disfigured by great Lakshmana, Surpanakha, the fearless wanderer, overwhelmed with fear said these cruel words to Ravana sitting with large, glittering eyes:इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे द्वात्रिंशस्सर्गः॥Thus ends the thirtysecond sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| अब्रवीद् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| दीप्तविशाललोचनं | दीप्त (√दीप् + क्त)–विशाल–लोचन (२.१) |
| प्रदर्शयित्वा | प्रदर्शयित्वा (√प्र-दर्शय् + ल्यप्) |
| भयमोहमूर्छिता | भय–मोह–मूर्छित (√मूर्छय् + क्त, १.१) |
| सुदारुणं | सु (अव्ययः)–दारुण (२.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अभीतचारिणी | अभीत–चारिन् (१.१) |
| महात्मना | महात्मन् (३.१) |
| शूर्पणखा | शूर्पणखा (१.१) |
| विरूपिता | विरूपित (√वि-रूपय् + क्त, १.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | म | ब्र | वी | द्दी | प्त | वि | शा | ल | लो | च | नं |
| प्र | द | र्श | यि | त्वा | भ | य | मो | ह | मू | र्छि | ता |
| सु | दा | रु | णं | वा | क्य | म | भी | त | चा | रि | णी |
| म | हा | त्म | ना | शू | र्प | ण | खा | वि | रू | पि | ता |
| ज | त | ज | र | ||||||||