पदच्छेदः
| हस्त्यश्वरथगाढानि | हस्तिन्–अश्व–रथ–गाढ (२.३) |
| नगराण्य् | नगर (२.३) |
| अवलोकयन् | अवलोकयत् (√अव-लोकय् + शतृ, १.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| समं | सम (२.१) |
| सर्वतः | सर्वतस् (अव्ययः) |
| स्निग्धं | स्निग्ध (२.१) |
| मृदुसंस्पर्शमारुतम् | मृदु–संस्पर्श–मारुत (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | स्त्य | श्व | र | थ | गा | ढा | नि |
| न | ग | रा | ण्य | व | लो | क | यन् |
| तं | स | मं | स | र्व | तः | स्नि | ग्धं |
| मृ | दु | सं | स्प | र्श | मा | रु | तम् |