पदच्छेदः
| अनूपं | अनूप (२.१) |
| सिन्धुराजस्य | सिन्धुराज (६.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| त्रिदिवोपमम् | त्रिदिव–उपम (२.१) |
| तत्रापश्यत् | तत्र (अव्ययः)–अपश्यत् (√पश् लङ् प्र.पु. एक.) |
| स | तद् (१.१) |
| मेघाभं | मेघ–आभ (२.१) |
| न्यग्रोधम् | न्यग्रोध (२.१) |
| ऋषिभिर् | ऋषि (३.३) |
| वृतम् | वृत (√वृ + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | नू | पं | सि | न्धु | रा | ज | स्य |
| द | द | र्श | त्रि | दि | वो | प | मम् |
| त | त्रा | प | श्य | त्स | मे | घा | भं |
| न्य | ग्रो | ध | मृ | षि | भि | र्वृ | तम् |