समन्ताद्यस्य ताः शाखाः शतयोजनमायताः ।
यस्य हस्तिनमादाय महाकायं च कच्चपम् ।
भक्षार्थं गरुडः शाखामाजगाम महाबलः ॥
समन्ताद्यस्य ताः शाखाः शतयोजनमायताः ।
यस्य हस्तिनमादाय महाकायं च कच्चपम् ।
भक्षार्थं गरुडः शाखामाजगाम महाबलः ॥
अन्वयः
महाबलः very strong, गरुडः Garuda, भक्षार्थम् for food, हस्तिनम् elephant, महाकायम् of huge body, कच्छपं च and tortoise, आदाय after getting, यस्य whose, शाखाम् branch, आजगाम came to,M N Dutt
And there he saw a fig tree, hued like clouds, surrounded by ascetics; its branches stretched around an hundred Yojanas, and the exceedingly powerful Garuda had ascended one of its boughs, taking an elephant and a huge tortoise, for the purpose of devouring them.Summary
In the past, the mighty Garuda brought an elephant and a huge tortoise and sat on a branch of this tree to feed on them.पदच्छेदः
| समन्ताद् | समन्तात् (अव्ययः) |
| यस्य | यद् (६.१) |
| ताः | तद् (१.३) |
| शाखाः | शाखा (१.३) |
| शतयोजनम् | शत–योजन (२.१) |
| आयताः | आयत (√आ-यम् + क्त, १.३) |
| यस्य | यद् (६.१) |
| हस्तिनम् | हस्तिन् (२.१) |
| आदाय | आदाय (√आ-दा + ल्यप्) |
| महाकायं | महत्–काय (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| कच्छपम् | कच्छप (२.१) |
| भक्षार्थं | भक्ष–अर्थ (२.१) |
| गरुडः | गरुड (१.१) |
| शाखाम् | शाखा (२.१) |
| आजगाम | आजगाम (√आ-गम् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महाबलः | महत्–बल (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | म | न्ता | द्य | स्य | ताः | शा | खाः | श | त | यो | ज |
| न | मा | य | ताः | य | स्य | ह | स्ति | न | मा | दा | य |
| म | हा | का | यं | च | क | च्च | पम् | भ | क्षा | र्थं | ग |
| रु | डः | शा | खा | मा | ज | गा | म | म | हा | ब | लः |