अन्वयः
मतिमान् wise, सः he (Garuda), तेनैव प्रहर्षेण out of that joy, द्विगुणीकृतविक्रमः with redoubled vigour, अमृतानयनार्थम् to obtain nectar, मतिम् चकार made up his mind.
M N Dutt
Thereat, attaining double energy by virtue of that delight, that intelligent one set his heart on bringing ambrosia.
Summary
Quite happy, his energy redoubled, wise Garuda made up his mind to obtain nectar.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तेनैव | तद् (३.१)–एव (अव्ययः) |
| प्रहर्षेण | प्रहर्ष (३.१) |
| द्विगुणीकृतविक्रमः | द्वि–गुणीकृत (√गुणी-कृ + क्त)–विक्रम (१.१) |
| अमृतानयनार्थं | अमृत–आनयन–अर्थ (२.१) |
| वै | वै (अव्ययः) |
| चकार | चकार (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| मतिमान् | मतिमत् (१.१) |
| मतिम् | मति (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | ते | नै | व | प्र | ह | र्षे | ण |
| द्वि | गु | णी | कृ | त | वि | क्र | मः |
| अ | मृ | ता | न | य | ना | र्थं | वै |
| च | का | र | म | ति | मा | न्म | तिम् |