अन्वयः
रामकथाम् mention of Rama's name, श्रुत्वा after hearing, महात्मनः of the great soul, तस्य मारीचस्य that Maricha's, वक्त्रम् mouth, शुष्कम् got dried, समभवत् became, परितप्त:was worried, बभूव हि became.
M N Dutt
Hearing Rāma's words, the face of the highsouled Mārīca became blank and he was seized with apprehension.
Summary
At the mention of Rama's name, great Maricha's mouth dried up and he became concerned.
पदच्छेदः
| तस्य | तद् (६.१) |
| रामकथां | राम–कथा (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| मारीचस्य | मारीच (६.१) |
| महात्मनः | महात्मन् (६.१) |
| शुष्कं | शुष्क (१.१) |
| समभवद् | समभवत् (√सम्-भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| वक्त्रं | वक्त्र (१.१) |
| परित्रस्तो | परित्रस्त (√परि-त्रस् + क्त, १.१) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्य | रा | म | क | थां | श्रु | त्वा |
| मा | री | च | स्य | म | हा | त्म | नः |
| शु | ष्कं | स | म | भ | व | द्व | क्त्रं |
| प | रि | त्र | स्तो | ब | भू | व | च |