किमुद्यमं व्यर्थमिमं कृत्वा ते राक्षसाधिप ।
दृष्टश्चेत्त्वं रणे तेन तदन्तं तव जीवितम् ।
जीवितं च सुखं चैव राज्यं चैव सुदुर्लभम् ॥
किमुद्यमं व्यर्थमिमं कृत्वा ते राक्षसाधिप ।
दृष्टश्चेत्त्वं रणे तेन तदन्तं तव जीवितम् ।
जीवितं च सुखं चैव राज्यं चैव सुदुर्लभम् ॥
अन्वयः
राक्षसाधिप chief of the demons, व्यर्थम् futile, इमम् this, उद्यमम् attempt, कृत्वा doing, ते you, किम् why, त्वम् you, रणे in war, तेन by him, दृष्टः seen, चेत् if, तव your, जीवितम् life, तदन्तम् that is the end.M N Dutt
Of what avail is this vain attempt O Rākşasa chief? No sooner Rāma shall see you in the battle you shall meet with your end.Summary
O chief of the demons, why do you make this futile attempt ? The moment you are seen by Rama in war will be the last of your life.पदच्छेदः
| किम् | क (२.१) |
| उद्यमं | उद्यम (२.१) |
| व्यर्थम् | व्यर्थ (२.१) |
| इमं | इदम् (२.१) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| राक्षसाधिप | राक्षस–अधिप (८.१) |
| दृष्टश् | दृष्ट (√दृश् + क्त, १.१) |
| चेत् | चेद् (अव्ययः) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| रणे | रण (७.१) |
| तेन | तेन (अव्ययः) |
| तदन्तं | तद्–अन्त (१.१) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| जीवितम् | जीवित (१.१) |
| जीवितं | जीवित (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सुखं | सुख (१.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| राज्यं | राज्य (१.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| सुदुर्लभम् | सु (अव्ययः)–दुर्लभ (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कि | मु | द्य | मं | व्य | र्थ | मि | मं | कृ | त्वा | ते | रा |
| क्ष | सा | धि | प | दृ | ष्ट | श्चे | त्त्वं | र | णे | ते | न |
| त | द | न्तं | त | व | जी | वि | तम् | जी | वि | तं | च |
| सु | खं | चै | व | रा | ज्यं | चै | व | सु | दु | र्ल | भम् |