दोषाणां च गुणानां च संप्रधार्य बलाबलम् ।
आत्मनश्च बलं ज्ञात्वा राघवस्य च तत्त्वतः ।
हितं हि तव निश्चित्य क्षमं त्वं कर्तुमर्हसि ॥
दोषाणां च गुणानां च संप्रधार्य बलाबलम् ।
आत्मनश्च बलं ज्ञात्वा राघवस्य च तत्त्वतः ।
हितं हि तव निश्चित्य क्षमं त्वं कर्तुमर्हसि ॥
अन्वयः
सः त्वम् you, धर्मिष्ठैः followers of righteous path, विभीषणपुरोगमैः by prominent people like Vibhisana, सर्वैः by all, सचिवैः सार्धम् with all ministers, मन्त्रयित्वा after discussing, आत्मनः yourself, निश्चयम् decision, कृत्वा take, दोषाणां च of demerits, गुणानां च of merits, बलाबलम् strength and weakness, सम्प्रधार्य assessing, आत्मनश्च your own, राघवस्य च Rama's, बलम् strength, तत्वतः in fact, ज्ञात्वा knowing, हिताहितम् welfare and otherwise, विनिश्चित्य after deciding, क्षमम् propriety, कर्तुम् to do, अर्हसि should.Summary
After consulting all your ministers and the righteous persons led by Vibhisana, you may take a decision. Assess the real strength and weakness, merits and demerits of your own and of Rama. Decide what is good or bad for you and then take steps you deem proper.पदच्छेदः
| दोषाणां | दोष (६.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| गुणानां | गुण (६.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| सम्प्रधार्य | सम्प्रधार्य (√सम्प्र-धारय् + ल्यप्) |
| बलाबलम् | बलाबल (२.१) |
| आत्मनश् | आत्मन् (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| बलं | बल (२.१) |
| ज्ञात्वा | ज्ञात्वा (√ज्ञा + क्त्वा) |
| राघवस्य | राघव (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| तत्त्वतः | तत्त्व (५.१) |
| हितं | हित (२.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| निश्चित्य | निश्चित्य (√निः-चि + ल्यप्) |
| क्षमं | क्षम (१.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ + तुमुन्) |
| अर्हसि | अर्हसि (√अर्ह् लट् म.पु. ) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दो | षा | णां | च | गु | णा | नां | च | सं | प्र | धा | र्य |
| ब | ला | ब | लम् | आ | त्म | न | श्च | ब | लं | ज्ञा | त्वा |
| रा | घ | व | स्य | च | त | त्त्व | तः | हि | तं | हि | त |
| व | नि | श्चि | त्य | क्ष | मं | त्वं | क | र्तु | म | र्ह | सि |