हर्म्यप्रासादसंबाधां नानारत्नविभूषिताम् ।
द्रक्ष्यसि त्वं पुरीं लङ्कां विनष्टां मैथिलीकृते ॥
हर्म्यप्रासादसंबाधां नानारत्नविभूषिताम् ।
द्रक्ष्यसि त्वं पुरीं लङ्कां विनष्टां मैथिलीकृते ॥
अन्वयः
हर्म्यप्रासादसम्बाधाम् with magnificent royal mansions, नानारत्नविभूषिताम् embellisted with various gems, लङ्कां पुरीम् city of Lanka, त्वम् you, मैथिलीकृते for the sake of Sita, विनष्टाम् ruined, द्रक्ष्यसि you will see.M N Dutt
And in vain shall you for Sītā compass the destruction of the city of Lankā, adorned with diverse jewels and filled with golden edifices.Summary
You will see the city of Lanka dotted with magnificent royal mansions embellished with different kinds of gems ruined for the sake of Sita.पदच्छेदः
| हर्म्यप्रासादसम्बाधां | हर्म्य–प्रासाद–सम्बाध (२.१) |
| नानारत्नविभूषिताम् | नाना (अव्ययः)–रत्न–विभूषित (√वि-भूषय् + क्त, २.१) |
| द्रक्ष्यसि | द्रक्ष्यसि (√दृश् लृट् म.पु. ) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| पुरीं | पुरी (२.१) |
| लङ्कां | लङ्का (२.१) |
| विनष्टां | विनष्ट (√वि-नश् + क्त, २.१) |
| मैथिलीकृते | मैथिली–कृत (√कृ + क्त, ७.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | र्म्य | प्रा | सा | द | सं | बा | धां |
| ना | ना | र | त्न | वि | भू | षि | ताम् |
| द्र | क्ष्य | सि | त्वं | पु | रीं | ल | ङ्कां |
| वि | न | ष्टां | मै | थि | ली | कृ | ते |