अन्वयः
दीप्तजिह्वः flaming red tongue, महाकायः big body, तीक्ष्णदंष्ट्रः sharp teeth, महाबलः very strong , मांसभक्षः feeding on flesh, महामृगः a huge animal, दण्डकारण्यम् Dandaka forest, व्यचरम् wandered.
Summary
I wandered in Dandaka forest in the form of a huge animal with a big and strong body, a flaming red tongue and sharp teeth feeding on flesh.
पदच्छेदः
| दीप्तजिह्वो | दीप्त (√दीप् + क्त)–जिह्वा (१.१) |
| महाकायस् | महत्–काय (१.१) |
| तीक्ष्णशृङ्गो | तीक्ष्ण–शृङ्ग (१.१) |
| महाबलः | महत्–बल (१.१) |
| व्यचरं | व्यचरम् (√वि-चर् लङ् उ.पु. ) |
| दण्डकारण्यं | दण्डक–अरण्य (२.१) |
| मांसभक्षो | मांसभक्ष (१.१) |
| महामृगः | महामृग (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| दी | प्त | जि | ह्वो | म | हा | का | य |
| स्ती | क्ष्ण | शृ | ण्गो | म | हा | ब | लः |
| व्य | च | र | न्द | ण्ड | का | र | ण्यं |
| मां | स | भ | क्षो | म | हा | मृ | गः |