अन्वयः
प्रभो O king, इदम् this, मृगरूपम् this form of a deer, भरतस्य to Bharata, आर्यपुत्रस्य for you, श्वश्रूणाम् for mothersinlaw, मम च to me, व्यक्तम् certainly, विस्मयम् wonder, जनयिष्यति will generate.
M N Dutt
O Lord, truly shall this celestial deer create surprise in Bharata, yourself, me and my mothers-in-law.
Summary
O king this deer will create amazement in Bharata, in mothersinlaw, in you and in me as well.
पदच्छेदः
| भरतस्यार्यपुत्रस्य | भरत (६.१)–आर्य–पुत्र (६.१) |
| श्वश्रूणां | श्वश्रू (६.३) |
| मम | मद् (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| प्रभो | प्रभु (८.१) |
| मृगरूपम् | मृग–रूप (१.१) |
| इदं | इदम् (१.१) |
| दिव्यं | दिव्य (१.१) |
| विस्मयं | विस्मय (२.१) |
| जनयिष्यति | जनयिष्यति (√जनय् लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भ | र | त | स्या | र्य | पु | त्र | स्य |
| श्व | श्रू | णां | म | म | च | प्र | भो |
| मृ | ग | रू | प | मि | दं | दि | व्यं |
| वि | स्म | यं | ज | न | यि | ष्य | ति |