पदच्छेदः
| बद्धासिर् | बद्ध (√बन्ध् + क्त)–असि (१.१) |
| धनुर् | धनुस् (२.१) |
| आदाय | आदाय (√आ-दा + ल्यप्) |
| प्रदुद्राव | प्रदुद्राव (√प्र-द्रु लिट् प्र.पु. एक.) |
| यतो | यतस् (अव्ययः) |
| मृगः | मृग (१.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| पश्यति | पश्यति (√दृश् लट् प्र.पु. एक.) |
| रूपेण | रूप (३.१) |
| द्योतमानम् | द्योतमान (√द्युत् + शानच्, २.१) |
| इवाग्रतः | इव (अव्ययः)–अग्रतस् (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब | द्धा | सि | र्ध | नु | रा | दा | य |
| प्र | दु | द्रा | व | य | तो | मृ | गः |
| तं | स | प | श्य | ति | रू | पे | ण |
| द्यो | त | मा | न | मि | वा | ग्र | तः |