पदच्छेदः
| शङ्कितं | शङ्कित (√शङ्क् + क्त, २.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| समुद्भ्रान्तम् | समुद्भ्रान्त (√समुद्-भ्रम् + क्त, २.१) |
| उत्पतन्तम् | उत्पतत् (√उत्-पत् + शतृ, २.१) |
| इवाम्बरे | इव (अव्ययः)–अम्बर (७.१) |
| दृश्यमानम् | दृश्यमान (√दृश् + शानच्, २.१) |
| अदृश्यं | अदृश्य (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| नवोद्देशेषु | नव–उद्देश (७.३) |
| केषुचित् | कश्चित् (७.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | ङ्कि | तं | तु | स | मु | द्भ्रा | न्त |
| मु | त्प | त | न्त | मि | वा | म्ब | रे |
| द | श्य | मा | न | म | दृ | श्यं | च |
| न | वो | द्दे | शे | षु | के | षु | चित् |