पदच्छेदः
| छिन्नाभ्रैर् | छिन्न (√छिद् + क्त)–अभ्र (३.३) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| संवीतं | संवीत (√सम्-व्ये + क्त, २.१) |
| शारदं | शारद (२.१) |
| चन्द्रमण्डलम् | चन्द्र–मण्डल (२.१) |
| मुहूर्ताद् | मुहूर्त (५.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| ददृशे | ददृशे (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| मुहुर् | मुहुर् (अव्ययः) |
| दूरात् | दूरात् (अव्ययः) |
| प्रकाशते | प्रकाशते (√प्र-काश् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| छि | न्ना | भ्रै | रि | व | सं | वी | तं |
| शा | र | दं | च | न्द्र | म | ण्ड | लम् |
| मु | हू | र्ता | दे | व | द | दृ | शे |
| मु | हु | र्दू | रा | त्प्र | का | श | ते |