पदच्छेदः
| दर्शनादर्शनेनैव | दर्शन–अदर्शन (३.१)–एव (अव्ययः) |
| सो | तद् (१.१) |
| ऽपाकर्षत | अपाकर्षत (√अप-कृष् लङ् प्र.पु. एक.) |
| राघवम् | राघव (२.१) |
| आसीत् | आसीत् (√अस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| क्रुद्धस् | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| काकुत्स्थो | काकुत्स्थ (१.१) |
| विवशस् | विवश (१.१) |
| तेन | तद् (३.१) |
| मोहितः | मोहित (√मोहय् + क्त, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| द | र्श | ना | द | र्श | ने | नै | व |
| सो | ऽपा | क | र्ष | त | रा | घ | वम् |
| आ | सी | त्क्रु | द्ध | स्तु | का | कु | त्स्थो |
| वि | व | श | स्ते | न | मो | हि | तः |