तामार्तरूपां विमना रुदन्तीं; सौमित्रिरालोक्य विशालनेत्राम् ।
आश्वासयामास न चैव भर्तु;स्तं भ्रातरं किंचिदुवाच सीता ॥
तामार्तरूपां विमना रुदन्तीं; सौमित्रिरालोक्य विशालनेत्राम् ।
आश्वासयामास न चैव भर्तु;स्तं भ्रातरं किंचिदुवाच सीता ॥
अन्वयः
सौमित्रिः Saumitri, विमनाः dejected, आर्तरूपाम् in a pitiable state, रुदन्तीम् crying, ताम् her, विशालनेत्राम् largeeyed, आलोक्य seeing, आश्वसयामास consoled, सीता Sita, भर्तुः husband's, भ्रातरम् brother, तम् him, किञ्चित् any thing, न उवाच did not speak.M N Dutt
Seeing the daughter of Janaka of expansive eyes weep thus in pitiable accents, Lakşmaņa losing his attention began to console her.Summary
Saumitri saw the largeeyed, dejected Sita crying in distress.He pacified and consoled her but she did not say anything at all to her husband's brother.पदच्छेदः
| ताम् | तद् (२.१) |
| आर्तरूपां | आर्त–रूप (२.१) |
| विमना | विमनस् (१.१) |
| रुदन्तीं | रुदत् (√रुद् + शतृ, २.१) |
| सौमित्रिर् | सौमित्रि (१.१) |
| आलोक्य | आलोक्य (√आ-लोकय् + ल्यप्) |
| विशालनेत्राम् | विशाल–नेत्र (२.१) |
| आश्वासयामास | आश्वासयामास (√आ-श्वासय् प्र.पु. एक.) |
| न | न (अव्ययः) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| भर्तुस् | भर्तृ (६.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| भ्रातरं | भ्रातृ (२.१) |
| किंचिद् | कश्चित् (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सीता | सीता (१.१) |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | मा | र्त | रू | पां | वि | म | ना | रु | द | न्तीं |
| सौ | मि | त्रि | रा | लो | क्य | वि | शा | ल | ने | त्राम् |
| आ | श्वा | स | या | मा | स | न | चै | व | भ | र्तु |
| स्तं | भ्रा | त | रं | किं | चि | दु | वा | च | सी | ता |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||