व्यसनं ते प्रियं मन्ये स्नेहो भ्रातरि नास्ति ते ।
तेन तिष्ठसि विस्रब्धस्तमपश्यन्महाद्युतिम् ॥
व्यसनं ते प्रियं मन्ये स्नेहो भ्रातरि नास्ति ते ।
तेन तिष्ठसि विस्रब्धस्तमपश्यन्महाद्युतिम् ॥
अन्वयः
ते to you, व्यसनम् distrees, प्रियम् dear, मन्ये I think, ते to you, भ्रातरि for your brother, स्नेहः love, नास्ति is not there, तेन by that, महाद्युतिम् brilliiant, तम् him, अपश्यन् not seen, विश्रब्धम् confident, तिष्ठसि you are standing.Summary
I think Rama's adversity is welcome to you. You do not have any love towards your brother. It is for this that you stand unconcerned instead of proceeding to help your brilliant brother.पदच्छेदः
| व्यसनं | व्यसन (२.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| प्रियं | प्रिय (२.१) |
| मन्ये | मन्ये (√मन् लट् उ.पु. ) |
| स्नेहो | स्नेह (१.१) |
| भ्रातरि | भ्रातृ (७.१) |
| नास्ति | न (अव्ययः)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| तेन | तेन (अव्ययः) |
| तिष्ठसि | तिष्ठसि (√स्था लट् म.पु. ) |
| विश्रब्धस् | विश्रब्ध (√वि-श्रम्भ् + क्त, १.१) |
| तम् | तद् (२.१) |
| अपश्यन् | अपश्यत् (१.१) |
| महाद्युतिम् | महत्–द्युति (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व्य | स | नं | ते | प्रि | यं | म | न्ये |
| स्ने | हो | भ्रा | त | रि | ना | स्ति | ते |
| ते | न | ति | ष्ठ | सि | वि | स्र | ब्ध |
| स्त | म | प | श्य | न्म | हा | द्यु | तिम् |