अन्वयः
मन्मथशराविष्टः struck by the arrows of the god of love, सः राक्षसाधिपः that lord of the demons, ब्रह्मघोषम् chanting from the Vedas, उदीरयन् while chanting, रहिते in a solitary spot, प्रश्रितम् humbly, वाक्यम् these words, अब्रवीत् spoke.
Summary
Thus addressed, Sita was enraged and her eyes turned red. She replied in harsh words to the chief of the demons in that solitary place:.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| मन्मथशराविष्टो | मन्मथ–शर–आविष्ट (√आ-विश् + क्त, १.१) |
| ब्रह्मघोषम् | ब्रह्मघोष (२.१) |
| उदीरयन् | उदीरयत् (√उत्-ईरय् + शतृ, १.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| प्रश्रितं | प्रश्रित (२.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| रहिते | रहित (७.१) |
| राक्षसाधिपः | राक्षस–अधिप (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | म | न्म | थ | श | रा | वि | ष्टो |
| ब्र | ह्म | घो | ष | मु | दी | र | यन् |
| अ | ब्र | वी | त्प्र | श्रि | तं | वा | क्यं |
| र | हि | ते | रा | क्ष | सा | धि | पः |