इति प्रशस्ता वैदेही रावणेन दुरात्मना ।
द्विजातिवेषेण हि तं दृष्ट्वा रावणमागतम् ।
सर्वैरतिथिसत्कारैः पूजयामास मैथिली ॥
इति प्रशस्ता वैदेही रावणेन दुरात्मना ।
द्विजातिवेषेण हि तं दृष्ट्वा रावणमागतम् ।
सर्वैरतिथिसत्कारैः पूजयामास मैथिली ॥
अन्वयः
दुरात्मना by the villain, रावणेन by Ravana, इति thus, प्रशस्ता praised, मैथिली Maithili, वैदेही princess of Videha, द्विजातिवेशेण in the guise of a brahmin, आगतम् come, तं रावणम् that Ravana, दृष्ट्वा after seeing, सर्वैः with all, अतिथिसत्कारैः with hospitality, पूजयामास honoured him.M N Dutt
Thus addressed was Vaidehĩ by the vicious souled Rāvana. Seeing him come under the guise of a twice-born one, Maithelee worshipped him with diverse articles necessary for serving a guest.Summary
Seeing Ravana, a villain in the guise of a brahmin praising her, Sita, the princess of Videha, honoured him with all hospitality.पदच्छेदः
| इति | इति (अव्ययः) |
| प्रशस्ता | प्रशस्त (√प्र-शंस् + क्त, १.१) |
| वैदेही | वैदेही (१.१) |
| रावणेन | रावण (३.१) |
| दुरात्मना | दुरात्मन् (३.१) |
| द्विजातिवेषेण | द्विजाति–वेष (३.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| रावणम् | रावण (२.१) |
| आगतम् | आगत (√आ-गम् + क्त, २.१) |
| सर्वैर् | सर्व (३.३) |
| अतिथिसत्कारैः | अतिथि–सत्कार (३.३) |
| पूजयामास | पूजयामास (√पूजय् प्र.पु. एक.) |
| मैथिली | मैथिली (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | ति | प्र | श | स्ता | वै | दे | ही | रा | व | णे | न |
| दु | रा | त्म | ना | द्वि | जा | ति | वे | षे | ण | हि | तं |
| दृ | ष्ट्वा | रा | व | ण | मा | ग | तम् | स | र्वै | र | ति |
| थि | स | त्का | रैः | पू | ज | या | मा | स | मै | थि | ली |