अन्वयः
इति thus, ब्रुवाणाम् while speaking, कैकेयीम् to Kaikeyi, मानदः respectable, सः he, मे my, श्वशुरः fatherinlaw, अन्वर्थैः अर्थैः riches, अयाचत requested, सा she, याञ्चाम् soliciting, न च चकार not agreed.
M N Dutt
Kaikeyī speaking thus, that lord of earth, my father-in-law begged her to accept diverse riches; but Kaikeyi did not agree.
Summary
The king, my fatherinlaw, who respected her offered riches. Which she did not accept.
पदच्छेदः
| इति | इति (अव्ययः) |
| ब्रुवाणां | ब्रुवाण (√ब्रू + शानच्, २.१) |
| कैकेयीं | कैकेयी (२.१) |
| श्वशुरो | श्वशुर (१.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| स | तद् (१.१) |
| मानदः | मानद (१.१) |
| अयाचतार्थैर् | अयाचत (√याच् लङ् प्र.पु. एक.)–अर्थ (३.३) |
| अन्वर्थैर् | अन्वर्थ (३.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| याच्ञां | याच्ञा (२.१) |
| चकार | चकार (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| सा | तद् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | ति | ब्रु | वा | णां | कै | के | यीं |
| श्व | शु | रो | मे | स | मा | न | दः |
| अ | या | च | ता | र्थै | र | न्व | र्थै |
| र्न | च | या | च्ञां | च | का | र | सा |