तिष्ठ तिष्ठ दशग्रीव मुहूर्तं पश्य रावण ।
युद्धातिथ्यं प्रदास्यामि यथाप्राणं निशाचर ।
वृन्तादिव फलं त्वां तु पातयेयं रथोत्तमात् ॥
तिष्ठ तिष्ठ दशग्रीव मुहूर्तं पश्य रावण ।
युद्धातिथ्यं प्रदास्यामि यथाप्राणं निशाचर ।
वृन्तादिव फलं त्वां तु पातयेयं रथोत्तमात् ॥
अन्वयः
दशग्रीव tenheaded, मुहूर्तम् for a short while, तिष्ठ तिष्ठ stay, stay, रावण Ravana, पश्य look, निशाचर nightwalker, यथाप्राणम् as long as I am alive, युद्धातिथ्यम् hospitality of war , प्रदास्यामि will accord, वृन्तात् from the stalk, फलमिव like a ripe fruit is dropped down, त्वाम् you, रथोत्तमात् from the best of the chariots, पातयेयम् will pull you down.Summary
O ten headed Ravana stay, stay for a while. O demon as long as I am alive I will treat you with the hospitality of war. You will be pulled down from this best of the chariots like a ripe fruit drops from the stalk.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे पञ्चाशस्सर्गः॥Thus ends the fiftieth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| तिष्ठ | तिष्ठ (√स्था लोट् म.पु. ) |
| तिष्ठ | तिष्ठ (√स्था लोट् म.पु. ) |
| दशग्रीव | दशग्रीव (८.१) |
| मुहूर्तं | मुहूर्त (२.१) |
| पश्य | पश्य (√पश् लोट् म.पु. ) |
| रावण | रावण (८.१) |
| युद्धातिथ्यं | युद्ध–आतिथ्य (२.१) |
| प्रदास्यामि | प्रदास्यामि (√प्र-दा लृट् उ.पु. ) |
| यथाप्राणं | यथाप्राणम् (अव्ययः) |
| निशाचर | निशाचर (८.१) |
| वृन्ताद् | वृन्त (५.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| फलं | फल (२.१) |
| त्वां | त्वद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| पातयेयं | पातयेयम् (√पातय् विधिलिङ् उ.पु. ) |
| रथोत्तमात् | रथ–उत्तम (५.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ति | ष्ठ | ति | ष्ठ | द | श | ग्री | व | मु | हू | र्तं | प |
| श्य | रा | व | ण | यु | द्धा | ति | थ्यं | प्र | दा | स्या | मि |
| य | था | प्रा | णं | नि | शा | च | र | वृ | न्ता | दि | व |
| फ | लं | त्वां | तु | पा | त | ये | यं | र | थो | त्त | मात् |