अन्वयः
जटायुषा by Jatayu, यथान्यायम् justly, इति in this manner, उक्तस्य told, क्रुद्धस्य of the enraged, रावणस्य Ravana's, सर्वाः all, विंशतिदृष्टयः twenty eyes, अग्निनिभाः like fire, रेजुः glowed.
Summary
Ravana's twenty eyes glowed like fire in anger after Jatayu thus rightly said.
पदच्छेदः
| इत्य् | इति (अव्ययः) |
| उक्तस्य | उक्त (√वच् + क्त, ६.१) |
| यथान्यायं | यथान्यायम् (अव्ययः) |
| रावणस्य | रावण (६.१) |
| जटायुषा | जटायुस् (३.१) |
| क्रुद्धस्याग्निनिभाः | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, ६.१)–अग्नि–निभ (१.३) |
| सर्वा | सर्व (१.३) |
| रेजुर् | रेजुः (√राज् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| विंशतिदृष्टयः | विंशति–दृष्टि (१.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | त्यु | क्त | स्य | य | था | न्या | यं |
| रा | व | ण | स्य | ज | टा | यु | षा |
| क्रु | द्ध | स्या | ग्नि | नि | भाः | स | र्वा |
| रे | जु | र्विं | श | ति | दृ | ष्ट | यः |