एतच्छ्रुत्वा तु काकुत्स्थस्तापसानां तपस्विनाम् ।
इदं प्रोवाच धर्मात्मा सर्वानेव तपस्विनः ।
नैवमर्हथ मां वक्तुमाज्ञाप्योऽहं तपस्विनम् ॥
एतच्छ्रुत्वा तु काकुत्स्थस्तापसानां तपस्विनाम् ।
इदं प्रोवाच धर्मात्मा सर्वानेव तपस्विनः ।
नैवमर्हथ मां वक्तुमाज्ञाप्योऽहं तपस्विनम् ॥
अन्वयः
धर्मात्मा righteous self, काकुत्स्थः of Kakutstha dynasty, तपस्विनाम् engaged in penance, तापसानाम् of the ascetics, एतत् this, श्रुत्वातु on hearing, सर्वानेव addressing them all, तपस्विनः ascetics, इदम् this, प्रोवाच said.M N Dutt
Hearing these words of the sages and ascetics, that righteous-souled one addressed them.Summary
Having heard this, righteous Rama of the Kakutstha dynasty said to all the ascetics engaged in penance:पदच्छेदः
| एतच् | एतद् (२.१) |
| छ्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| काकुत्स्थस् | काकुत्स्थ (१.१) |
| तापसानां | तापस (६.३) |
| तपस्विनाम् | तपस्विन् (६.३) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| प्रोवाच | प्रोवाच (√प्र-वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| तपस्विनः | तपस्विन् (२.३) |
| नैवम् | न (अव्ययः)–एवम् (अव्ययः) |
| अर्हथ | अर्हथ (√अर्ह् लट् म.पु. द्वि.) |
| मां | मद् (२.१) |
| वक्तुम् | वक्तुम् (√वच् + तुमुन्) |
| आज्ञाप्यो | आज्ञाप्य (√आ-ज्ञापय् + कृत्, १.१) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| तपस्विनाम् | तपस्विन् (६.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | त | च्छ्रु | त्वा | तु | का | कु | त्स्थ | स्ता | प | सा | नां |
| त | प | स्वि | नाम् | इ | दं | प्रो | वा | च | ध | र्मा | त्मा |
| स | र्वा | ने | व | त | प | स्वि | नः | नै | व | म | र्ह |
| थ | मां | व | क्तु | मा | ज्ञा | प्यो | ऽहं | त | प | स्वि | नम् |