पदच्छेदः
| रुदितं | रुदित (√रुद् + क्त, १.१) |
| व्यपमृष्टास्रं | व्यपमृष्ट (√व्यप-मृष् + क्त)–अस्र (१.१) |
| चन्द्रवत् | चन्द्र–वत् (अव्ययः) |
| प्रियदर्शनम् | प्रिय–दर्शन (१.१) |
| सुनासं | सु (अव्ययः)–नासा (१.१) |
| चारुताम्रौष्ठम् | चारु–ताम्र–ओष्ठ (१.१) |
| आकाशे | आकाश (७.१) |
| हाटकप्रभम् | हाटक–प्रभा (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रु | दि | तं | व्य | प | मृ | ष्टा | स्त्रं |
| च | न्द्र | व | त्प्रि | य | द | र्श | नम् |
| सु | ना | सं | चा | रु | ता | म्रौ | ष्ठ |
| मा | का | षे | हा | ट | क | प्र | भम् |