तप्तकाञ्चनपुष्पां च वैदूर्यप्रवरच्छदाम् ।
द्रक्ष्यसे शाल्मलीं तीक्ष्णामायसैः कण्टकैश्चिताम् ॥
तप्तकाञ्चनपुष्पां च वैदूर्यप्रवरच्छदाम् ।
द्रक्ष्यसे शाल्मलीं तीक्ष्णामायसैः कण्टकैश्चिताम् ॥
अन्वयः
तप्ककाञ्चनपुष्पाम् with bright golden flowers, वैडूर्यप्रवरच्छदाम् with barks of excellent Vaidurya stones like bark, आयसैः with iron, कण्टकैः thorns, चिताम् logged, तीक्ष्णाम् sharp, शाल्मलीम् salmali (silkcotton) tree, द्रक्ष्यसे you see.Summary
You will see a log of salmali tree with bright golden flowers and excellent vaidurya stone with pointed iron thorns.पदच्छेदः
| तप्तकाञ्चनपुष्पां | तप्त (√तप् + क्त)–काञ्चन–पुष्प (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| वैडूर्यप्रवरच्छदाम् | वैडूर्य–प्रवर–छद (२.१) |
| द्रक्ष्यसे | द्रक्ष्यसे (√दृश् लृट् म.पु. ) |
| शाल्मलीं | शाल्मली (२.१) |
| तीक्ष्णाम् | तीक्ष्ण (२.१) |
| आयसैः | आयस (३.३) |
| कण्टकैश् | कण्टक (३.३) |
| चिताम् | चित (√चि + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | प्त | का | ञ्च | न | पु | ष्पां | च |
| वै | दू | र्य | प्र | व | र | च्छ | दाम् |
| द्र | क्ष्य | से | शा | ल्म | लीं | ती | क्ष्णा |
| मा | य | सैः | क | ण्ट | कै | श्चि | ताम् |