अन्वयः
त्वम् you, लङ्कायां in Lanka's, सुमहत् vast, इदम् this, राज्यम् kingdom, अनुपालय you may rule, मद्विधाः people like me, देवाश्चापि even gods, चराचराः all mobile and immobile beings, त्वत्प्रेष्याः will be at beck and call.
Summary
Rule this vast kingdom of Lanka. People like me, even gods and all beings, mobile and immobile, will be at your beck and call.
पदच्छेदः
| लङ्कायां | लङ्का (७.१) |
| सुमहद् | सु (अव्ययः)–महत् (२.१) |
| राज्यम् | राज्य (२.१) |
| इदं | इदम् (२.१) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| अनुपालय | अनुपालय (√अनु-पालय् लोट् म.पु. ) |
| अभिषेकोदकक्लिन्ना | अभिषेक–उदक–क्लिन्न (√क्लिद् + क्त, १.१) |
| तुष्टा | तुष्ट (√तुष् + क्त, १.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| रमयस्व | रमयस्व (√रमय् लोट् म.पु. ) |
| माम् | मद् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ल | ङ्का | यां | सु | म | ह | द्रा | ज्य |
| मि | दं | त्व | म | नु | पा | ल | य |
| अ | भि | षे | को | द | क | क्लि | न्ना |
| तु | ष्टा | च | र | म | य | स्व | माम् |