न विन्दते तत्र तु शर्म मैथिली; विरूपनेत्राभिरतीव तर्जिता ।
पतिं स्मरन्ती दयितं च देवरं; विचेतनाभूद्भयशोकपीडिता ॥
न विन्दते तत्र तु शर्म मैथिली; विरूपनेत्राभिरतीव तर्जिता ।
पतिं स्मरन्ती दयितं च देवरं; विचेतनाभूद्भयशोकपीडिता ॥
अन्वयः
विरूपनेत्राभिः by women of deformed eyes, अतीव excessively, तर्जिता threatened, मैथिली Sita, तत्र there, शर्म peace, न विन्दते not had, दयितम् beloved, पतिम् husband, देवतं च desired deity, स्मरन्ती while remembering, भयशोकपीडिता tortured by fear and grief, विचेतना lost conciousness, अभूत् became.M N Dutt
And greatly up-braided by the fierce eyes (of the Raksasis), Maithili did not know repose; and, afflicted with grief and fear, she, remembering her beloved lord along with Lakşmaņa swooned away.Summary
Sita had no peace as she was threatened excessively by those women of deformed looks. Remembering her beloved husband who was also her god, and overtaken by fear and grief , she fell unconscious.इतयार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये अरण्यकाण्डे षटपञ्चाशस्सर्गः॥Thus ends the fiftysixth sarga of Aranyakanda of the holy Ramayana the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| विन्दते | विन्दते (√विद् लट् प्र.पु. एक.) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| शर्म | शर्मन् (२.१) |
| मैथिली | मैथिली (१.१) |
| विरूपनेत्राभिर् | विरूप–नेत्र (३.३) |
| अतीव | अतीव (अव्ययः) |
| तर्जिता | तर्जित (√तर्जय् + क्त, १.१) |
| पतिं | पति (२.१) |
| स्मरन्ती | स्मरत् (√स्मृ + शतृ, १.१) |
| दयितं | दयित (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| देवरं | देवर (२.१) |
| विचेतनाभूद् | विचेतन (१.१)–अभूत् (√भू प्र.पु. एक.) |
| भयशोकपीडिता | भय–शोक–पीडित (√पीडय् + क्त, १.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | वि | न्द | ते | त | त्र | तु | श | र्म | मै | थि | ली |
| वि | रू | प | ने | त्रा | भि | र | ती | व | त | र्जि | ता |
| प | तिं | स्म | र | न्ती | द | यि | तं | च | दे | व | रं |
| वि | चे | त | ना | भू | द्भ | य | शो | क | पी | डि | ता |
| ज | त | ज | र | ||||||||