किंनिमित्तं तु केनापि भ्रातुरालम्ब्य मे स्वरम् ।
विस्वरं व्याहृतं वाक्यं लक्ष्मण त्राहि मामिति ।
न भवत्या व्यथा कार्या कुनारीजनसेविता ॥
किंनिमित्तं तु केनापि भ्रातुरालम्ब्य मे स्वरम् ।
विस्वरं व्याहृतं वाक्यं लक्ष्मण त्राहि मामिति ।
न भवत्या व्यथा कार्या कुनारीजनसेविता ॥
अन्वयः
शोभने O fair lady, किं निमित्तं तु for some reason, केनापि राक्षसेन by some demon, मे भ्रातुः my brother's, स्वरम् voice, आलम्ब्य adapting, त्राहि त्राहि इति 'save me, save me', वाक्यम् these words, ईरितम् is said.M N Dutt
Some one for some purpose, assuming my brother's voice, is crying-O Laksmana, save me.Summary
O fair lady, for some reason some demon has uttered these words 'Save me, save me' adapting my brother's voice.पदच्छेदः
| किंनिमित्तं | किंनिमित्त (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| केनापि | क (३.१)–अपि (अव्ययः) |
| भ्रातुर् | भ्रातृ (६.१) |
| आलम्ब्य | आलम्ब्य (√आ-लम्ब् + ल्यप्) |
| मे | मद् (६.१) |
| स्वरम् | स्वर (२.१) |
| विस्वरं | विस्वर (१.१) |
| व्याहृतं | व्याहृत (√व्या-हृ + क्त, १.१) |
| वाक्यं | वाक्य (१.१) |
| लक्ष्मण | लक्ष्मण (८.१) |
| त्राहि | त्राहि (√त्रा लोट् म.पु. ) |
| माम् | मद् (२.१) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| न | न (अव्ययः) |
| भवत्या | भवत् (३.१) |
| व्यथा | व्यथा (१.१) |
| कार्या | कार्य (√कृ + कृत्, १.१) |
| कुनारीजनसेविता | कुनारी–जन–सेवित (√सेव् + क्त, १.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| किं | नि | मि | त्तं | तु | के | ना | पि | भ्रा | तु | रा | ल |
| म्ब्य | मे | स्व | रम् | वि | स्व | रं | व्या | हृ | तं | वा | क्यं |
| ल | क्ष्म | ण | त्रा | हि | मा | मि | ति | न | भ | व | त्या |
| व्य | था | का | र्या | कु | ना | री | ज | न | से | वि | ता |