विकृष्य चापं परिधाय सायकं; सलील बाणेन च ताडितो मया ।
मार्गीं तनुं त्यज्य च विक्लवस्वरो; बभूव केयूरधरः स राक्षसः ॥
विकृष्य चापं परिधाय सायकं; सलील बाणेन च ताडितो मया ।
मार्गीं तनुं त्यज्य च विक्लवस्वरो; बभूव केयूरधरः स राक्षसः ॥
अन्वयः
मया by me, चापम् bow, विकृष्य bending, सायकम् an arrow, परिधाय after fixing, सलीलबाणेन arrow released with ease, ताडितः beaten , सः he, मार्गीम् a deer, तनुम् body, त्यज्य having, सविक्लबस्वर: painful voice, केयूरधरः with a bracelet, राक्षसः demon, बभूव lay down.M N Dutt
I hit him stretching my brow slightly and fixing the shaft on it; when, renouncing his deerform he became a Rākṣasa wearing a bracelet and began to emit distressful shrieks.Summary
Bending the bow I fixed the arrow and released it at ease. Hit by that arrow he gave up his guise of the deer and assuming the form of a demon with a bracelet on his arm fell down groaning.पदच्छेदः
| विकृष्य | विकृष्य (√वि-कृष् + ल्यप्) |
| चापं | चाप (२.१) |
| परिधाय | परिधाय (√परि-धा + ल्यप्) |
| सायकं | सायक (२.१) |
| सलीलबाणेन | सलील–बाण (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| ताडितो | ताडित (√ताडय् + क्त, १.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| मार्गीं | मार्ग (२.१) |
| तनुं | तनु (२.१) |
| त्यज्य | त्यज्य (√त्यज् + क्त्वा) |
| च | च (अव्ययः) |
| विक्लवस्वरो | विक्लव–स्वर (१.१) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| केयूरधरः | केयूर–धर (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| राक्षसः | राक्षस (१.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | कृ | ष्य | चा | पं | प | रि | धा | य | सा | य | कं |
| स | ली | ल | बा | णे | न | च | ता | डि | तो | म | या |
| मा | र्गीं | त | नुं | त्य | ज्य | च | वि | क्ल | व | स्व | रो |
| ब | भू | व | के | यू | र | ध | रः | स | रा | क्ष | सः |
| ज | त | ज | र | ||||||||