अन्वयः
अथ then, त्वरमाणः hastening , सीता दर्शनलालसः eager to see, जगाम went, शून्यम् empty, आवसथम् hermitage, दृष्ट्वा saw, उद्विग्नमानसः with an anxious mind, बभूव became.
M N Dutt
Eager to behold Sītā, he proceeded fast; but finding the abode empty, he was filled with anxiety.
Summary
Anxious to see Sita, he hastened to the hermitage and finding it empty, became restless.
पदच्छेदः
| त्वरमाणो | त्वरमाण (√त्वर् + शानच्, १.१) |
| जगामाथ | जगाम (√गम् लिट् प्र.पु. एक.)–अथ (अव्ययः) |
| सीतादर्शनलालसः | सीता–दर्शन–लालस (१.१) |
| शून्यम् | शून्य (२.१) |
| आवसथं | आवसथ (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| बभूवोद्विग्नमानसः | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.)–उद्विग्न (√उत्-विज् + क्त)–मानस (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त्व | र | मा | णो | ज | गा | मा | थ |
| सी | ता | द | र्श | न | ला | ल | सः |
| शू | न्य | मा | व | स | थं | दृ | ष्ट्वा |
| ब | भू | वो | द्वि | ग्न | मा | न | सः |