पदच्छेदः
| निखिलेन | निखिल (३.१) |
| विचिन्वन्तौ | विचिन्वत् (√वि-चि + शतृ, १.२) |
| नैव | न (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| ताम् | तद् (२.१) |
| अभिजग्मतुः | अभिजग्मतुः (√अभि-गम् लिट् प्र.पु. द्वि.) |
| विचित्य | विचित्य (√वि-चि + ल्यप्) |
| सर्वतः | सर्वतस् (अव्ययः) |
| शैलं | शैल (२.१) |
| रामो | राम (१.१) |
| लक्ष्मणम् | लक्ष्मण (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | खि | ले | न | वि | चि | न्व | न्तौ |
| नै | व | ता | म | भि | ज | ग्म | तुः |
| वि | चि | त्य | स | र्व | तः | शै | लं |
| रा | मो | ल | क्ष्म | ण | म | ब्र | वीत् |