अन्वयः
सीतादर्शनकर्शितः emaciated on account of not finding Sita, रामः Rama, तया नद्या by that river not replying, सीतायाः of Sita, दर्शने see, निराशः disappointed, कृतः was made, सौमित्रिम् to Lakshmana, उवाच said.
Summary
Disappointed by the river and emaciated by not being able to see Sita, Rama said to Lakshmana :
पदच्छेदः
| निराशस् | निराश (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तया | तद् (३.१) |
| नद्या | नदी (३.१) |
| सीताया | सीता (६.१) |
| दर्शने | दर्शन (७.१) |
| कृतः | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| रामः | राम (१.१) |
| सौमित्रिं | सौमित्रि (२.१) |
| सीतादर्शनकर्शितः | सीता–अदर्शन–कर्शित (√कर्शय् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| नि | रा | श | स्तु | त | या | न | द्या |
| सी | ता | या | द | र्श | ने | कृ | तः |
| उ | वा | च | रा | मः | सौ | मि | त्रिं |
| सी | ता | द | र्श | न | क | र्शि | तः |