अन्वयः
सौमित्रे Lakshmana, तप्तबिन्दुनिकाशैः shining like drops of gold, चित्रैः variegated, क्षतजबिन्दुभिः drops of blood, सर्वतः all over, आवृतम् spread, धरणीतलाम् on the ground, पश्य see.
Summary
See, O Lakshmana, the patches of blood looking like drops of shining gold spread all over the ground.
पदच्छेदः
| तप्तबिन्दुनिकाशैश् | तप्त (√तप् + क्त)–बिन्दु–निकाश (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| चित्रैः | चित्र (३.३) |
| क्षतजबिन्दुभिः | क्षतज–बिन्दु (३.३) |
| आवृतं | आवृत (√आ-वृ + क्त, २.१) |
| पश्य | पश्य (√पश् लोट् म.पु. ) |
| सौमित्रे | सौमित्रि (८.१) |
| सर्वतो | सर्वतस् (अव्ययः) |
| धरणीतलम् | धरणी–तल (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | प्त | बि | न्दु | नि | का | शै | श्च |
| चि | त्रैः | क्ष | त | ज | बि | न्दु | भिः |
| आ | वृ | तं | प | श्य | सौ | मि | त्रे |
| स | र्व | तो | ध | र | णी | त | लम् |