अन्वयः
तरुणादित्यसङ्काशम् looking like the morning Sun, वैडूर्यगुलिकाचितम् studded with Vaidurya (cat's eye), काञ्चनम् gold, कस्य whose, विशीर्णम् spread all over, कवचम् shield, भूमौ on the ground, पतितम् fallen?
Summary
Whose is this shield of gold studded with Vaidurya, broken and strewn all over the ground, shining like the morning Sun?
पदच्छेदः
| तरुणादित्यसंकाशं | तरुण–आदित्य–संकाश (१.१) |
| वैडूर्यगुलिकाचितम् | वैडूर्य–गुलिका–चित (√चि + क्त, १.१) |
| विशीर्णं | विशीर्ण (√वि-शृ + क्त, १.१) |
| पतितं | पतित (√पत् + क्त, १.१) |
| भूमौ | भूमि (७.१) |
| कवचं | कवच (१.१) |
| कस्य | क (६.१) |
| काञ्चनम् | काञ्चन (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | रु | णा | दि | त्य | सं | का | शं |
| वै | दू | र्य | गु | लि | का | चि | तम् |
| वि | शी | र्णं | प | ति | तं | भू | मौ |
| क | व | चं | क | स्य | का | ञ्च | नम् |